फार्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार आज पाक शहेर कर्बला में हजारों हुसैनी अज़ादारों ने बैनुल-हरमैन (हज़रत इमाम हुसैन अ. और हज़रत अब्बास अ. के रौज़ों के बीच का हिस्सा) में बहरैन के झंडे उठाकर आले खलीफा सरकार के खिलाफ बहरैनी क्रांतिकारियों के समर्थन का ऐलान किया। कर्बला में मुहर्रम के दिनों के शुरू से रसूले इस्लाम (स.अ.) के नाती हज़रत इमाम हुसैन अ. और उनके वफ़ादार सहाबियों की अज़ादारी का सिलसिला शुरू होता है और इराक और दुनिया के गोशे व किनारे से लाखों हुसैनी अज़ादार, अज़ादारी में हिस्सा लेते हैं, बहरैन के ऑले खलीफा सरकार ने हुसैनी अज़ादारों की अज़ादारी में बड़े स्तर पर भागीदारी से भयभीत होकर, आशूरा के जुलूसों पर पाबंदी लगा दी है। आले खली़फा सरकार, कर्बला की घटना और हज़रत रसूले अकरम (स.) के परिवार पर होने वाले ज़ुल्म व अत्याचार के बयान को बहरैन सरकार के ख़िलाफ़ माहौल बिगड़ने का कारण समझती है।जबकि हर मातमी टुकड़ी में हज़रत अब्बास (अ) का मुबारक अलम (फ़्लैग) फहराता हुआ नजर आ रहा है। पाकिस्तान और हिंदुस्तान में आज रात नौ मुहर्रम है इस रात को तासूआ-ए-हुसैनी कहते हैं। चौदह सदियाँ बीत जाने के बावजूद कर्बला की खूनी घटना और हज़रत रसूले इस्लाम के नवासे हज़रत इमाम हुसैन (अ) और आपके वफ़ादार सहाबियों की शहादत के महत्व में और इस घटना की इज्जत में न केवल कोई कमी नहीं हुई बल्कि उनमें हर दिन बढ़ोतरी होती जा रही है और जैसे जैसे समय बीत रहा है, कर्बला का संदेश और अधिक फ़ैलता पा रहा है और शहीदों के सरदार इमाम हुसैन का महत्व बढ़ता जा रहा।ईरान का रेडियो टेलीविजन, तासूआ और आशूरए हुसैनी के आगमन के हिसाब से मुसलमानाने आलम और शियायाने जहां और दुनिया के सभी आज़ाद लोगों की ज़बान की सेवा में दिल की गहराई से संवेदना प्रदान करता है।.......166.......166
22 नवंबर 2012 - 20:30
समाचार कोड: 367159
आज पाक शहेर कर्बला में हजारों हुसैनी अज़ादारों ने बैनुल-हरमैन (हज़रत इमाम हुसैन अ. और हज़रत अब्बास अ. के रौज़ों के बीच का हिस्सा) में बहरैन के झंडे उठाकर आले खलीफा सरकार के खिलाफ बहरैनी क्रांतिकारियों के समर्थन का ऐलान किया।